Most secret tantra meditation to attain lot of wealth health and power full bless.
Shiva-Lakshmi Connection: While Lakshmi is Vishnu’s consort, Tantric practices often unite Shiva and Lakshmi (or their energies) for holistic well-being, recognizing Lakshmi as the source of all power (Shakti).
Meaning of Her Name
“Ka” (Saraswati) + “Ma” (Lakshmi) + “Akshi” (Eyes): This signifies that Goddess Kamakshi embodies the wisdom of Saraswati and the wealth of Lakshmi within her gaze, representing complete divine power and presence.
the Lakshmi Kamakshi Chakra), and Abhishekam (sacred bathing) of Shivalingam (especially Parad Shivalingam) using items like milk, honey, and Bel leaves to attract wealth, success, and spiritual fulfillment, rooted in texts like the Lakshmi Tantra, a Pancaratra Agama text elevating Lakshmi as supreme power (Shakti).
Lakshmi Tantra –
The Expanding Goddess: Lakshmi as the Source of All Shaktis Chapter 30
One Becomes Many
Lakshmi speaks to Indra with great compassion:
“Though you see Me as one form, I exist as countless manifestations. From Me arise Saraswati, Durga, Kali, and all the goddesses— each one carrying a face of power, wisdom, and protection.”
This chapter begins the divine branching—where Mahālakṣmī becomes many, not to confuse us, but to help us relate to her infinite nature.
Why the Goddess Becomes Many
The world is complex. So Lakshmi wears different faces for different needs.
For wisdom, she becomes Saraswati
For protection, she becomes Durga
For fierce cleansing, she becomes Kali
For nourishment, she remains as Lakshmi
She says:
“I am the Mother of the Universe. And as a mother changes her tone for each child, I too wear different names for different souls.”
The Ten Powers: Faces of the Divine Feminine
In this section, Lakshmi begins revealing her ten powerful expansions, which later traditions identify as the Dasa Mahavidyas. Though the Lakshmi Tantra doesn’t name all of them directly, it hints at their energies:
1. Wisdom (Medhā) – the goddess of memory and sharp intellect
2. Speech (Vāk) – divine power of voice and creation
3. Protection (Durga) – the inner force that removes danger
4. Transformation (Kālī) – the destroyer of ignorance and ego
5. Order (Ṛta) – the goddess who maintains balance
6. Wealth (Dhana Lakshmi) – prosperity in righteous form
7. Fertility (Sṛṣṭi Lakshmi) – the power of new creation
8. Compassion (Karunā) – divine mercy in action
9. Liberation (Moksha Lakshmi) – freedom from rebirth
10. Time (Kāla Lakshmi) – the one who governs cycles and change
All these are not separate goddesses, but reflections of Mahālakṣmī’s single, infinite being.
Lakshmi: The Root Shakti
Lakshmi declares:
“Without Me, no goddess can move. I am the Shakti behind their Shakti.”
This statement is subtle but powerful.
It does not reduce the other goddesses
It shows that Lakshmi is the invisible source, the power behind power
Like a lamp that fuels many flames— All the other deities shine through her essence.
Mantras That Reflect Her Many Forms
In this chapter, she also gives hints toward composite mantras:
“Chant not only ‘Śrīṁ’ but combine it with ‘Hrīṁ’, ‘Klīṁ’, and ‘Aiṁ’. These seed sounds carry My different powers.”
Here’s how they connect:
Śrīṁ – Abundance and grace (Lakshmi)
Hrīṁ – Purity and spiritual heart (Mahāmāyā)
Klīṁ – Attraction and love (Kāmadeva Shakti)
Aiṁ – Speech and wisdom (Saraswati)
By meditating on these syllables, the yogī awakens different energies of the goddess within.
The Universe as Her Body
Lakshmi gives a profound teaching:
“The sun is My eye. The moon is My mind. The stars are My ornaments. Earth is My altar.”
Everything sacred, everything beautiful, everything nourishing—is a limb of Lakshmi. She is not in the temple only. She is the temple, the world, the heart, and the soul.
Final Reflection
This chapter changes how we see the Goddess.
No longer one idol, one name, or one form… Lakshmi becomes a living network of divine power—present in every goddess, every mantra, every force that sustains this universe.
To know Lakshmi is to begin to see Shakti in everything. Lakshmi Tantra Sadhana method Get mantra Energized yantra mala diksha Mercury Shivling are Shri Yantra. Chant mantra infront of Yantra mercury shivling for maximum benefits and protection. Contact for complete detail.
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उच्च श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना उच्चे: श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना महामाया का खेल योनि तंत्रा उच्च श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना एक गुप्त साधना है जिस से अपार धन दौलत की प्राप्ति की जाति है।आज की दुनिया मे धन सम्पति … Continue reading उच्च: श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना→
नाग लक्ष्मी मंत्र साधना नाग दोष राहु दोष निवारण नाग लक्ष्मी सिद्ध यँत्र माला पारद श्रीं यन्त्र स्थापित कर के मंत्र साधना करनी चाहिए। ‘ॐ नमो नागलक्ष्म्यै पातालनिवासिन्यै नमः’) और स्तोत्रों का जाप किया जाता है, जो नागों से … Continue reading नाग लक्ष्मी नागदोष राहु दोष शांति मंत्र साधना हवन→
अघोर लक्ष्मी साधना अघोर लक्ष्मी माता की एक दुर्लभ, तांत्रिक और अत्यन्त गूढ़ रूप से साधी जाने वाली साधना है। यह साधना मुख्य रूप से तांत्रिक मार्ग, श्मशान, रात्रि साधनाओं तथा अघोर परम्परा से सम्बद्ध है।इस साधना का उद्देश्य … Continue reading अघोर Aghor Lakshmi mantra sadhana→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें स्थान पर हैं। वह परम सौभाग्य प्रदात्री हैं। जो जातक उनकी आराधना करता है, वह उनका … Continue reading कमला देवी महाविधा→
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है। कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, कमलगट्टों की माला पर श्रीमन्त्र का जप, बिल्वपत्र तथा बिल्वफल के हवन से कमला की विशेष … Continue reading कमला हवन यज्ञ→
कमला लक्ष्मी देवी The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining her blessings with the power of the Gayatri mantra. It is chanted to attract abundance, peace, … Continue reading कमला देवी/ गायत्री / शनि→
कमला लक्ष्मी देवी मंत्र साधना Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग भैरवी मंत्र साधना छिन्नमस्ता देवी … Continue reading कमला लक्ष्मी देवी Kamala Mantra Video→
उच्चे: श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना महामाया का खेल योनि तंत्रा उच्च श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना एक गुप्त साधना है जिस से अपार धन दौलत की प्राप्ति की जाति है। आज की दुनिया मे धन सम्पति कितनी महत्वपूर्ण है।
इंसान किस तरह से ईश्वर से विमुख हो कर धन विहीन हो जाता है तथा साधना से उस टूटे हुए तारों को जोड़ कर पुनः धन वैभव सुख शांति प्राप्त कर सकता है। तंत्र का असल मतलब हीं है अपने बुनना, ऊर्जा के सच्चे स्रोत के साथ अपनी ऊर्जा की बुनाई (जुड़ना) करना।
एक बार भगवान विष्णु वैकुण्ठ लोक में लक्ष्मी जी के साथ विराजमान थे।
उसी समय उच्चेः श्रवा नामक अश्व पर सवार होकर रेवंत का आगमन हुआ। उच्चेः श्रवा अश्व सभी लक्षणों से युक्त, देखने में अत्यंत सुन्दर था। उसकी सुंदरता की तुलना किसी अन्य अश्व से नहीं की जा सकती थी।
Uchshrva lakshmi
लक्ष्मी जी माया के प्रभाव मे उस अश्व के सौंदर्य को एकटक देखती रह गई। जब भगवान विष्णु ने लक्ष्मी को मंत्रमुग्ध होकर अश्व को देखते हुए पाया तो उन्होंने उनका ध्यान अश्व की ओर से हटाना चाहा, लेकिन लक्ष्मी जी देखने में तल्लीन रही। झकझोरने पर भी लक्ष्मी जी की तंद्रा भंग नहीं हुई तब इसे अपनी अवहेलना समझकर भगवान विष्णु को क्रोध आ गया और खीझ कर लक्ष्मी को शाप देते हुए कहा- “तुम इस अश्व के सौंदर्य में इतनी खोई हो कि मेरे द्वारा बार-बार झकझोरने पर भी तुम्हारा ध्यान इसी में लगा रहा, अतः तुम अश्वी हो जाओ।” जब लक्ष्मी का ध्यान भंग हुआ और शाप का पता चला तो वे क्षमा मांगती हुई समर्पित भाव से भगवान विष्णु की वंदना करने लगी- “मैं आपके वियोग में एक पल भी जीवित नहीं रह पाउंगी, अतः आप मुझ पर कृपा करे एवं अपना शाप वापस ले ले।” अपने शाप में सुधार करते हुए कहा- “शाप तो पूरी तरह वापस नहीं लिया जा सकता। लेकिन हां, तुम्हारे अश्व रूप में पुत्र प्रसव के बाद तुम्हे इस योनि से मुक्ति मिलेगी और तुम पुनः मेरे पास वापस लौटोगी।” भगवान विष्णु के शाप से अश्वी बनी हुई लक्ष्मी जी यमुना और तमसा नदी के संगम पर भगवान शिव की तपस्या करने लगी। लक्ष्मी जी के तप से प्रसन्न होकर शिव पार्वती के साथ आए। उन्होंने लक्ष्मी जी से तप करने का कारण पूछा तब लक्ष्मी जी ने अश्वी हो जाने से संबंधित सारा वृतांत उन्हें सुना दिया और अपने उद्धार की उनसे प्रार्थना की। तब भगवान शिव ने कहा- “देवी ! तुम चिंता न करो। इसके लिए मैं विष्णु को समझाऊंगा कि वे अश्व रूप धारणकर तुम्हारे साथ रमण करे और तुमसे अपने जैसा ही पुत्र उत्पन्न करे ताकि तुम उनके पास शीघ्र वापस जा सको।”भगवान शिव की बात सुनकर अश्वी रूप धारी लक्ष्मी जी को काफी प्रसन्नता हुई। उन्हें यह आभास होने लगा कि अब मैं शीघ्र ही शाप के बंधन से मुक्त हो जाउंगी और श्री हरि (विष्णु) को प्राप्त कर लुंगी।
भगवान शिव वहां से चले गए। अश्वी रूप धारी लक्ष्मी जी पुनः तपस्या में लग गई। काफी समय बीत गया। लेकिन भगवान विष्णु उनके समीप नहीं आए। तब उन्होंने भगवान शिव का पुनः स्मरण किया।
भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने लक्ष्मी जी को संतुष्ट करते हुए कहा- “देवी ! धैर्य धारण करो। धैर्य का फल मीठा होता है। विष्णु जी अश्व रूप में तुम्हारे समीप अवश्य आएंगे।इतना कहकर भगवान शिव अंतर्धान हो गए। कैलाश पहुंचकर भगवान शिव विचार करने लगे कि विष्णु को कैसे अश्व बनाकर लक्ष्मी जी के पास भेजा जाए। अंत में, उन्होंने अपने एक गण-चित्ररूप को दूत बनाकर विष्णु के पास भेजा।चित्ररूप भगवान विष्णु के लोक में पहुंचे। भगवान शिव का दूत आया है, यह जानकर भगवान विष्णु ने दूत से सारा समाचार कहने को कहा। दूत ने भगवान शिव की सारी बाते उन्हें कह सुनाई।अंत में, भगवान विष्णु शिव का प्रस्ताव मानकर अश्व बनने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने अश्व का रूप धारण किया और पहुंच गए यमुना और तपसा के संगम पर जहां लक्ष्मी जी अश्वी का रूप धारण कर तपस्या कर रही थी। भगवान विष्णु को अश्व रूप में आया देखकर अश्वी रूप धारी लक्ष्मी जी काफी प्रसन्न हुई। दोनों एक साथ विचरण एवं रमण करने लगे। कुछ ही समय पश्चात अश्वी रूप धारी लक्ष्मी जी गर्भवती हो गई। यथा समय अश्वी के गर्भ से एक सुन्दर बालक का जन्म हुआ।
तत्पश्चात लक्ष्मी जी वैकुण्ठ लोक श्री हरि विष्णु के पास चली गई।लक्ष्मी जी के जाने के बाद उस बालक के पालन पोषण की जिम्मेवारी ययाति के पुत्र तुर्वसु ने ले ली, क्योंकि वे संतान हीन थे और पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ कर रहे थे। उस बालक का नाम हैहय रखा गया। कालांतर में हैहय के वंशज ही हैहयवंशी कहलाए।
विशेष : 1. लक्ष्मी जी ने माया का प्रभाव अपने ऊपर ले कर कैसे मानव जाति को समझाने की कोशिश की है की,इसी महामाया के प्रभाव मे आ कर हीं मानव जाति कैसे पथ भृष्ट हो जाती है जिस से धन लक्ष्मी वैभव की शक्ति न्यून हो जाती है जिस को मंत्र साधना से पुनः प्राप्त किया जाता है।
2. इस पौराणिक कथा से महामाया कैसे खेल खेलती है इस का सत्य भी उजागर होता है l
3. हमारी खुद की प्रवृतियों के तामसिक होने पर हमे किस तरह से लक्ष्मी धन विहीन हो कर अधम योनियों में भी जन्म लेना पड़ सकता है।
उच्च श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना एक गुप्त साधना है जिस से अपार धन दौलत की प्राप्ति की जाति है। यह जीवन (sex) ऊर्जा के टूटे हुए तारों को उस के ठीक स्थान पर जोड़ा जाता है। जिस से धन की ऊर्जा को जीवन मे उतारा जाता है। इस साधना की पूर्ण विधि प्राप्त कर साधना कर सकते है। जिस से धन की ऊर्जा को प्राप्त किया जा सके।
ॐ Kamakashi Lakshmi Shiva Tantra Sadhana Most secret tantra meditation to attain lot of wealth health and power full bless. Shiva-Lakshmi Connection: While Lakshmi is Vishnu’s consort, Tantric practices often unite Shiva and Lakshmi (or their energies) for holistic … Continue reading Kamakshi Lakshmi Shiv Tantra→
उच्च श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना उच्चे: श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना महामाया का खेल योनि तंत्रा उच्च श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना एक गुप्त साधना है जिस से अपार धन दौलत की प्राप्ति की जाति है।आज की दुनिया मे धन सम्पति … Continue reading उच्च: श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना→
नाग लक्ष्मी मंत्र साधना नाग दोष राहु दोष निवारण नाग लक्ष्मी सिद्ध यँत्र माला पारद श्रीं यन्त्र स्थापित कर के मंत्र साधना करनी चाहिए। ‘ॐ नमो नागलक्ष्म्यै पातालनिवासिन्यै नमः’) और स्तोत्रों का जाप किया जाता है, जो नागों से … Continue reading नाग लक्ष्मी नागदोष राहु दोष शांति मंत्र साधना हवन→
अघोर लक्ष्मी साधना अघोर लक्ष्मी माता की एक दुर्लभ, तांत्रिक और अत्यन्त गूढ़ रूप से साधी जाने वाली साधना है। यह साधना मुख्य रूप से तांत्रिक मार्ग, श्मशान, रात्रि साधनाओं तथा अघोर परम्परा से सम्बद्ध है।इस साधना का उद्देश्य … Continue reading अघोर Aghor Lakshmi mantra sadhana→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें स्थान पर हैं। वह परम सौभाग्य प्रदात्री हैं। जो जातक उनकी आराधना करता है, वह उनका … Continue reading कमला देवी महाविधा→
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है। कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, कमलगट्टों की माला पर श्रीमन्त्र का जप, बिल्वपत्र तथा बिल्वफल के हवन से कमला की विशेष … Continue reading कमला हवन यज्ञ→
कमला लक्ष्मी देवी The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining her blessings with the power of the Gayatri mantra. It is chanted to attract abundance, peace, … Continue reading कमला देवी/ गायत्री / शनि→
कमला लक्ष्मी देवी मंत्र साधना Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग भैरवी मंत्र साधना छिन्नमस्ता देवी … Continue reading कमला लक्ष्मी देवी Kamala Mantra Video→
नाग लक्ष्मी मंत्र साधना नाग दोष राहु दोष निवारण नाग लक्ष्मी सिद्ध यँत्र माला पारद श्रीं यन्त्र स्थापित कर के मंत्र साधना करनी चाहिए।
‘ॐ नमो नागलक्ष्म्यै पातालनिवासिन्यै नमः’) और स्तोत्रों का जाप किया जाता है, जो नागों से जुड़ी शक्तियों को जागृत करते हैं। प्रमुख नाग लक्ष्मी मंत्र (Mantra for Nag Lakshmi) कालसर्प दोष निवारण मंत्र:
(यह मंत्र कालसर्प दोष और राहु-केतु के भय को दूर करने के लिए है). पटलवासिनी मंत्र: “ॐ नमो नागलक्ष्म्यै पातालवासिन्यै नमः। अनन्तेशप्रिया देवि शुद्धसत्त्वस्वरूपिणि॥”
(यह देवी को पाताल लोक की स्वामिनी और शुद्ध सत्त्व स्वरूपिणी कहकर नमन करता है). नागेश्वरी मंत्र (ग्रह शांति के लिए): “नागेश्वरि नमस्तुभ्यं कुरु मे ग्रहसौम्यता॥” (ग्रहों को शांत करने और सौम्य बनाने के लिए).
श्रीनागराजराजेश्वरी नागमहालक्ष्मी स्तोत्र
(पूरा श्लोक – अंश) यह स्तोत्र नाग लक्ष्मी के विभिन्न रूपों का वर्णन करता है और उनसे सुरक्षा मांगता है:
“नागलक्ष्मी शिरः पातु, ज्ञानशक्ति प्रदायिनी।” (नाग लक्ष्मी मेरे सिर की रक्षा करें, ज्ञान शक्ति प्रदान करें). “हृदये कुण्डली रक्षेत्, नाभौ श्रीशेषवासिनी।” (हृदय में कुण्डलिनी और नाभि में शेषनाग निवास करें). “बाहुयोः विषहरा पातु, पृष्ठे नागमातृका।”
शास्त्रों में भगवान महाविष्णु के एक रूप जिन्हें भगवान अनंत/संकर्षण/आदिशेष आदि कहा जाता है यह मूर्ति दिव्य रूप पाताल से भी नीचे विराजमान हैं। उन्हें भगवान परमविष्णु के ५ मुख्य रूपों में से एक रूप माना जाता है। यह पांचवां रूप स्थूल और तमोगुण का अधिष्ठाता है। प्रलय काल में इनकी ही भुकुटि से कालाग्नि रूद्र की उत्पत्ति होती है। यही कालराज और महासंकर्षण भी है। यह प्रभु अपने एक रूप से पाताल में स्थित है और दूसरे रूप से भौतिक ब्रह्माण्ड में विराट रूप में सूक्ष्म रूप से व्याप्त है। यह दस दिग्पाल में से एक पाताल के दिग्पाल है इन्हें ही जगदाधार कहा जाता है क्योंकि यह ही समस्त ब्रह्माण्डों का आधार स्तम्भ है। इन्हीं सर्व शक्तिमान की पत्नी और शक्ति देवी नागलक्ष्मी है। यह महाकुंडलिनी त्रिशक्ति रूपा है ।
(यह देवी ही अपने दूसरे अन्य उग्र प्रचंड तांत्रिक रूप में पाताललक्ष्मी और अघोरलक्ष्मी भी कहलाती है ।उन स्वरूप की पूजा साधना घर में गृहस्थ लोग नहीं करते। जबकि नागलक्ष्मी सौम्य रूपा है घर में पूजित है)
लक्ष्मण जी और बलराम जी की पत्नियां नागलक्ष्मी का अवतार थीं
लोकपरंपरा से निर्मित इस स्तोत्र में मां नागलक्ष्मी से जन्म कुंडली के दोषों और अशुभ ग्रहों की पीड़ाओं से रक्षा की प्रार्थना की गई है। यह स्तोत्र मुख्य रूप से कालसर्प दोष, राहु-केतु, शनि बाधा, कुंडली दोष, एवं गूढ़ ग्रह बाधाओं के निवारण हेतु मां नागलक्ष्मी से की गई एक प्रार्थना है।
दीपावली के एक दिन पूर्व कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नाग दीपावली भी कहते हैं। माना जाता है इस दिन नागलोक में माता नागलक्ष्मी का पूजन किया जाता है। नाग लक्ष्मी पूजा में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों की एक साथ पूजन स्मरण करें। भगवान विष्णु को तुलसीपत्र और मां लक्ष्मी को बेलपत्र चढाये। नागलक्ष्मी को दूध और उससे बने मिष्ठान का भोग लगाएं। अनारदाना आंवला ऋतुफल सुगंधित पुष्प/इत्र चढ़ाए.।
🌷🌷श्रीनागराजराजेश्वरी नागमहालक्ष्मी स्तोत्रम् 🌷🌷 ( हिन्दी अनुवाद सहित)
(नाग लक्ष्मी, आपको प्रणाम। आप नागराज की शक्ति हैं, जो नाग भक्तों को अनुग्रहित करती हैं। कालसर्प दोष और जन्मकुंडली के दोषों को दूर करने वाली, राहु-केतु के भय को हरने वाली नाग लक्ष्मी को मेरा नमन।)
भावार्थ तीन नेत्रों वाली, चन्द्र समान मुख वाली, नागों के आभूषणों से सुशोभित, मोरपंख मुकुट से सुशोभिता—ऐसी नागलक्ष्मी को मैं प्रणाम करता हूँ।
🍁अनन्तशयिनी लक्ष्मीः संकर्षणप्रिया सदा। योगिनां ध्येयरूपा च नागलक्ष्मीं नमाम्यहम्॥५५
भावार्थ जो अनन्त शय्या पर विराजमान नारायण की अर्धांगिनी हैं, संकर्षण को प्रिय हैं, योगियों द्वारा ध्यान की जाने योग्य हैं—उन नागलक्ष्मी को मैं नमन करता हूँ।
हिंदी सार: जो साधक यह कवच श्रद्धा से पढ़ता है, उसकी बुद्धि, शरीर, वाणी, चित्त, और जीवन सभी पर नागलक्ष्मी की कृपा बनती है। वह विष, भय, ग्रहदोष, मानसिक क्लेश, और आत्मिक दुर्बलता से मुक्त हो जाता है। 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀
03..🌷🌷नागलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली 🌷🌷🌷 (नागलक्ष्मी के १०८ नाम)
(प्रत्येक नाम के श्री और पीछे नमः लगाकर पाठ करें )
🌷🌷नागलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली 2 🌷🌷🌷 (नागलक्ष्मी के १०८ नाम) नाग लक्ष्मी के 108 यह नाम दुर्लभ हैं, क्योंकि वे पारंपरिक ग्रंथों में विस्तार से नहीं मिलते। नीचे आपको नाग लक्ष्मी से संबंधित प्रमुख नाम और उनकी शक्तियों के आधार पर 108 नामों का एक और सुंदर संग्रह प्रस्तुत कर रहा हूँ, जो नाग लक्ष्मी की महिमा, स्वरूप और ऊर्जा को समर्पित हैं।
नाग लक्ष्मी मंत्र या स्तोत्र अनुष्ठान हेतु. साधना का समय व अवधि: श्रेष्ठ समय: –कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (नाग दीपावली) नागपंचमी, श्रावण मास, अमावस्या, शनिवार, या राहु काल में। अनुष्ठान हेतु कुल अवधि: 11, 21 या 51 दिन। (बाकी जो साधना नहीं करते वह नित्य पूजा में अपने अनुसार स्तोत्र या मंत्र जप कर सकते हैं )
आवश्यक सामग्री: नाग लक्ष्मी यंत्र या श्रीयंत्र शालिग्राम
पीला आसन, सफेद वस्त्र चंदन, नागकेसर, श्वेत पुष्प, अक्षत, दीपक, धूप। काले तिल, दुग्ध या जल से भरा नागकलश (तांबे का लोटा)।
संकल्प (हाथ में जल लेकर):
(हिंदी में बोलें) “ॐ सर्वग्रह दोष निवारणं, कालसर्प पीड़ा शमनं, चित्तशुद्धि, समृद्धि, और नाग लक्ष्मी कृपा प्राप्त्यर्थं, अनेन साधनायामहं संकल्पयामि।”
1. गुरु मंत्रजप स्मरण/गणपति पूजन – विघ्न शांति हेतु। नवग्रह/पंचदेव/कुलदेव/ईष्ट देव स्मरण 2. नागदेवता आवाहन – शेषनाग, वासुकि, तक्षक आदि का स्मरण। 3. नाग लक्ष्मी आवाहन और पंचोपचार पूजन। 4. कवच-पाठ, फिर स्तोत्र-पाठ। 5. मूल मंत्र जप या स्तोत्र पाठ करें। मालाः: रुद्राक्ष /रक्त चंदन/कमलगट्टा माला (या साधारण माला)
अर्थ:–नाग लक्ष्मी, आपको प्रणाम। आप नागराज की शक्ति हैं, जो नाग भक्तों को अनुग्रहित करती हैं। कालसर्प दोष और जन्मकुंडली के दोषों को दूर करने वाली, राहु-केतु के भय को हरने वाली नाग लक्ष्मी को मेरा नमन।
प्रार्थना हे नागलक्ष्मी! एवं भगवान नारायण मेरी साधना में जो त्रुटियाँ हों, उन्हें क्षमा करें। मुझे आपकी कृपा का पात्र बनाएं। हे लक्ष्मी नारायण मुझे ग्रहदोषों से मुक्त कर सुख, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करें।”
सबसे अंत में भगवान विष्णु की स्तुति करें
🍁🍁भगवान विष्णु की स्तुति 🍁🍁🍁 शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभ्यहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥ अर्थ: जो शांत स्वरूप है, जो विशाल सर्प के ऊपर लेटे हुए हैं, जिनकी नाभि से कमल का फूल निकला है, जो सब देवों के देव हैं, जो संपूर्ण सृष्टि का आधार हैं, जो आकाश की तरह विशाल हैं, मेघों के समान रंग वाले हैं, सुंदर शरीर वाले हैं, जो भगवती लक्ष्मी के पति हैं। जिनके कमल जैसे सुंदर नेत्र हें। जिनके मूल ब्रह स्वरूप को सिद्ध योगी ऋषि भी ध्यान द्वारा पूर्ण रूप से नहीं जानते मैं ऐसे विष्णु को प्रणाम करता हूं जो सांसारिक भय को दूर करते हैं और सभी लोकों के एकमात्र स्वामी हैं.
पूजा हवन करवाने से कई गुना ज्यादा फल प्राप्त होता हैं।
७. विशेष निर्देश: पूजा के बाद प्रसाद के रूप में मिठाई या फल वितरण करें। जप पूर्ण करने के बाद दीपक बुझाएं नहीं — स्वयं शांत होने दें। यदि आप सक्षम हो तो अनुष्ठान करने के बाद 21 या 51 दिन में एक दिन “नाग भोज/नाग दान” गुरु जी व गरीब ब्राह्मण/पुजारियों को “नाग वस्त्र” (काले वस्त्र) दान करें। अथवा किसी मंदिर में एक पुजारी को यथासंभव दान दक्षिणा दे। सावधानी: इस साधना में निंदा, मांस, मद्य या अहंकार वर्जित है। पूजा हवन यन्त्र माला अनुष्ठान के लिए contact करें
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उच्च श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना उच्चे: श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना महामाया का खेल योनि तंत्रा उच्च श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना एक गुप्त साधना है जिस से अपार धन दौलत की प्राप्ति की जाति है।आज की दुनिया मे धन सम्पति … Continue reading उच्च: श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना→
नाग लक्ष्मी मंत्र साधना नाग दोष राहु दोष निवारण नाग लक्ष्मी सिद्ध यँत्र माला पारद श्रीं यन्त्र स्थापित कर के मंत्र साधना करनी चाहिए। ‘ॐ नमो नागलक्ष्म्यै पातालनिवासिन्यै नमः’) और स्तोत्रों का जाप किया जाता है, जो नागों से … Continue reading नाग लक्ष्मी नागदोष राहु दोष शांति मंत्र साधना हवन→
अघोर लक्ष्मी साधना अघोर लक्ष्मी माता की एक दुर्लभ, तांत्रिक और अत्यन्त गूढ़ रूप से साधी जाने वाली साधना है। यह साधना मुख्य रूप से तांत्रिक मार्ग, श्मशान, रात्रि साधनाओं तथा अघोर परम्परा से सम्बद्ध है।इस साधना का उद्देश्य … Continue reading अघोर Aghor Lakshmi mantra sadhana→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें स्थान पर हैं। वह परम सौभाग्य प्रदात्री हैं। जो जातक उनकी आराधना करता है, वह उनका … Continue reading कमला देवी महाविधा→
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है। कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, कमलगट्टों की माला पर श्रीमन्त्र का जप, बिल्वपत्र तथा बिल्वफल के हवन से कमला की विशेष … Continue reading कमला हवन यज्ञ→
कमला लक्ष्मी देवी The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining her blessings with the power of the Gayatri mantra. It is chanted to attract abundance, peace, … Continue reading कमला देवी/ गायत्री / शनि→
कमला लक्ष्मी देवी मंत्र साधना Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग भैरवी मंत्र साधना छिन्नमस्ता देवी … Continue reading कमला लक्ष्मी देवी Kamala Mantra Video→
अघोर लक्ष्मी माता की एक दुर्लभ, तांत्रिक और अत्यन्त गूढ़ रूप से साधी जाने वाली साधना है। यह साधना मुख्य रूप से तांत्रिक मार्ग, श्मशान, रात्रि साधनाओं तथा अघोर परम्परा से सम्बद्ध है। इस साधना का उद्देश्य केवल भौतिक संपत्ति न होकर— रुकावटों का नाश, दारिद्र्य का शमन, तेज–ओज की वृद्धि और साधक के भीतर स्थित ‘अघोरी शक्ति प्रवाह’ का जागरण है।
>>अघोर लक्ष्मी का स्वरूप :=
>माता का रूप उग्र-करुण, अघोर–तत्वयुक्त, और शक्ति-तत्त्व प्रधान माना गया है। >यह रूप विशेष रूप से काली, तारा और धूमावती के निकटस्थ माना जाता है। >यह साधना साधक की अन्तःवृत्तियों का रूपांतरण करती है—लोभ, भय, दुर्बलता का क्षय करती है।
🙏🏼अघोर लक्ष्मी साधना के लाभ 🙏🏼
अघोर लक्ष्मी साधना साधारण लक्ष्मी साधना से अधिक उग्र, तांत्रिक और तेजस्वी मानी जाती है। यह साधना केवल धन वृद्धि नहीं, बल्कि गहरे स्तर पर ऊर्जा शोधन, भय-नाश, बाधा-निवारण और साधक के भीतर स्थित शक्तियों को जागृत करती है।
1. दारिद्र्य और आर्थिक रुकावटों का नाश :=
>अघोर लक्ष्मी साधना का प्रथम फल: >अचानक मिलने वाला धन >रुके हुए पैसे की प्राप्ति >नौकरी, व्यवसाय या धन प्रवाह में अड़चनों का समाप्त होना >यह साधना “दारिद्र्य ऊर्जा” को काटने के लिए प्रसिद्ध है।
2.बाधा, नज़र और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा :=
अघोर रूप स्वयं उग्र-रक्षात्मक है। इससे साधक को लाभ मिलता है— >शत्रु बाधा, नज़रदोष, अभिचार/तंत्र बाधा से सुरक्षा >घर या कार्यस्थल की नकारात्मकता का शमन >मानसिक भय, चिंता और असुरक्षा में कमी
3. तांत्रिक शक्ति और तेज में वृद्धि :=
>अघोर लक्ष्मी साधना साधक के भीतर >तेज, ओज, आभामण्डल >आकर्षण और व्यक्तित्व शक्ति को सक्रिय करती है। इससे साधक और अधिक निर्भय, दृढ़ और प्रभावशाली बनता है।
4. अचानक मिलने वाले अवसर :=
साधना के प्रभाव से अक्सर— >अचानक धन लाभ >कहीं से अप्रत्याशित लाभ >व्यापार में अनपेक्षित उन्नति >नए अनुबंध, अवसर, सहयोग मिलने लगते हैं।
5. मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति :=
यह साधना मन के गहरे अवरोध खोलती है: >आत्मविश्वास बढ़ना >निर्णय क्षमता बढ़ना >भय का नाश >मन में स्थिरता >आध्यात्मिक जागरण (विशेषकर सूक्ष्म-ऊर्जा की अनुभूति)
6. घर-परिवार में समृद्धि और रक्षक ऊर्जा :=
अघोर लक्ष्मी की उपस्थिति से घर में— >विवाद कम >ऊर्जा स्थिर >लक्ष्मी-टिकाव होता है। >उग्र रूप होने से यह बुरी शक्तियों को दूर रखती है।
7. साधक के कर्म-प्रवाह में परिवर्तन :=
यह एक विशेष लाभ है: >पुराने कर्मबन्धन टूटते हैं >जीवन की दिशा बदलती है >साधक की तकदीर तेज़ी से खुलने लगती है
8. आत्मबल, साहस, निर्णय-शक्ति में वृद्धि :=
अघोर रूप साधक की भीतरी कमजोरियों को तोड़ देता है। साधक अधिक साहसी, स्वतंत्र, शक्तिशाली अनुभव करता है।
9. उग्र रूप की कृपा से शत्रु पर विजय :=
यह साधना मानसिक, ऊर्जात्मक या व्यावहारिक, हर प्रकार की शत्रु बाधा से रक्षा देती है। अघोर लक्ष्मी मंत्र विधि :
मंत्र सिद्ध अघोर लक्ष्मी यन्त्र माला पारद श्रीं यन्त्र मंत्र विधि के लिए Contact करें।
ॐ Kamakashi Lakshmi Shiva Tantra Sadhana Most secret tantra meditation to attain lot of wealth health and power full bless. Shiva-Lakshmi Connection: While Lakshmi is Vishnu’s consort, Tantric practices often unite Shiva and Lakshmi (or their energies) for holistic … Continue reading Kamakshi Lakshmi Shiv Tantra→
उच्च श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना उच्चे: श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना महामाया का खेल योनि तंत्रा उच्च श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना एक गुप्त साधना है जिस से अपार धन दौलत की प्राप्ति की जाति है।आज की दुनिया मे धन सम्पति … Continue reading उच्च: श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना→
नाग लक्ष्मी मंत्र साधना नाग दोष राहु दोष निवारण नाग लक्ष्मी सिद्ध यँत्र माला पारद श्रीं यन्त्र स्थापित कर के मंत्र साधना करनी चाहिए। ‘ॐ नमो नागलक्ष्म्यै पातालनिवासिन्यै नमः’) और स्तोत्रों का जाप किया जाता है, जो नागों से … Continue reading नाग लक्ष्मी नागदोष राहु दोष शांति मंत्र साधना हवन→
अघोर लक्ष्मी साधना अघोर लक्ष्मी माता की एक दुर्लभ, तांत्रिक और अत्यन्त गूढ़ रूप से साधी जाने वाली साधना है। यह साधना मुख्य रूप से तांत्रिक मार्ग, श्मशान, रात्रि साधनाओं तथा अघोर परम्परा से सम्बद्ध है।इस साधना का उद्देश्य … Continue reading अघोर Aghor Lakshmi mantra sadhana→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें स्थान पर हैं। वह परम सौभाग्य प्रदात्री हैं। जो जातक उनकी आराधना करता है, वह उनका … Continue reading कमला देवी महाविधा→
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है। कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, कमलगट्टों की माला पर श्रीमन्त्र का जप, बिल्वपत्र तथा बिल्वफल के हवन से कमला की विशेष … Continue reading कमला हवन यज्ञ→
कमला लक्ष्मी देवी The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining her blessings with the power of the Gayatri mantra. It is chanted to attract abundance, peace, … Continue reading कमला देवी/ गायत्री / शनि→
कमला लक्ष्मी देवी मंत्र साधना Das Maha Vidhaya 10 Great goddess of universe. महाकाली तंत्र मंत्र साधना तारा देवी मंत्र तंत्र साधना त्रिपुरा सुंदरी तंत्र मंत्र साधना भुव्ने्श्वरी देवी तंत्र मंत्र साधना भैरवी देवी/लिंग भैरवी मंत्र साधना छिन्नमस्ता देवी … Continue reading कमला लक्ष्मी देवी Kamala Mantra Video→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें स्थान पर हैं। वह परम सौभाग्य प्रदात्री हैं। जो जातक उनकी आराधना करता है, वह उनका घर धन और धान्य से परिपूर्ण कर देती हैं। नवरात्रि की तरह गुप्त नवरात्रि का समापन भी श्रीकमला की आराधना से होता है। कमल के पुष्प पर विराजमान देवी कमला का संबंध कमल से है। कमल पर पुष्प पर आसीन होने के कारण ही उनका नाम कमला पड़ा। देवी को कमल पुष्प प्रिय है। कमल कीचड़ और दलदल में खिलता है। यानी नाकारात्मक परिवेश होने पर भी सकारात्मकता के पुष्प खिल सकते हैं। स्वच्छता और पवित्रता देवी भगवती को प्रिय है। उनका अलग से श्रीकुल है। उनको प्रकाश प्रिय है। अंधेरे से नफऱत है। वह नारायणी हैं। भगवान विष्णु के साथ गमन करती हैं। वह प्रसन्न होती हैं जो तिजोरी भर देती हैं। लेकिन यदि अप्रसन्न होती हैं तो अपनी बहन अलक्ष्मी के साथ वह रंक भी बना देती हैं। देवी की आराधना तीनों लोकों में दानव, दैत्य, देवता तथा मनुष्य सभी करते हैं।स्वरूप से देवी कमला अत्यंत ही दिव्य तथा मनोहर एवं सुन्दर हैं, इनकी प्राप्ति समुद्र मंथन के समय हुई थीं तथा इन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में वरन किया था। देवी कमला! तांत्रिक लक्ष्मी के नाम से भी जानी जाती हैं, श्री विद्या महा त्रिपुरसुन्दरी की आराधना कर देवी, श्री पद से युक्त हुई तथा महा-लक्ष्मी नाम से विख्यात भी। देवी कमला चतुर्भुजी हैं। उनका प्रादुर्भाव की कथा समुद्र मंथन से जुड़ती है। समुद्र मंथन के समय देवी भगवती अमृत कलश लेकर निकली। दीवाली इनका महापर्व है। दश महाविद्या में कमला देवी की आराधना के साथ गुप्त नवरात्रि संपन्न होते हैं। वस्तुत: वही अन्नपूर्णा हैं। सौभाग्य और सौंदर्य की उपमा उनसे ही दी जाती है। मूल नाम : कमला। प्रसिद्ध नाम : लक्ष्मी, कमलात्मिका, श्री भैरव : श्री विष्णु तिथि : अश्विन मास पूर्णिमास दीपावली कुल : श्री कुल दिशा : उत्तर-पूर्व। स्वभाव : सौम्य लक्षण : सुख, शांति, सौभाग्य, धन-यश की अधिष्ठात्री शरीर सौष्ठव: सूर्य की कांति सदृशइस महाविद्या की साधना नदी तालाब या समुद्र में गिरने वाले जल में आकंठ डूब कर की जाती है। मान्यता है कि इसकी पूजा करने से व्यक्ति साक्षात कुबेर के समान धनी और विद्यावान हो जाता है और व्यक्ति का यश, व्यापार व प्रभुत्व संसार भर में प्रचारित हो जाता है।
लक्ष्मी जी भी देह धारण करती हैं ! जैसे रामावतार में सीता , कृष्ण अवतार में रुक्मणि और शेष सभी अवतारों में विष्णु की पत्नी के रूप में वह प्रकट हुईं ! देवी भागवत के अनुसार – लक्ष्मी बैकुंठ में महालक्ष्मी – क्षीर सागर में विष्णु जी की शेष शैय्या पर लक्ष्मी रूप – इन्द्र के भवन में स्वर्ग लक्ष्मी – राजभवन में राजलक्ष्मी – गृहस्थों के यहाँ गृहलक्ष्मी – भवन में गृहदेव – समुद्र से उत्पन्न सुरभि गाय तथा यज्ञ में दक्षिणा के रूप में सदैव विराजमान रहती हैं ! श्री महालक्ष्मी का आसन कमल बताया गया है तथा उनके एक हाथ में कमलपुष्प सदैव विद्यमान रहता है ! दो हाथी अपनी सूंड में जलपूरित स्वर्ण कलश दबाये सदैव इनके दायें बाएं खड़े रहते हैं ! इनका प्रिय वाहन उल्लू है ! इनके एक हाथ में कमल , दूसरे में विल्वफल , तीसरे में अभय मुद्रा तथा चौथे में वरमुद्रा रहती है !
ॐ Kamakashi Lakshmi Shiva Tantra Sadhana Most secret tantra meditation to attain lot of wealth health and power full bless. Shiva-Lakshmi Connection: While Lakshmi … Continue reading Kamakshi Lakshmi Shiv Tantra→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें स्थान … Continue reading कमला देवी महाविधा→
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है। कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, कमलगट्टों … Continue reading कमला हवन यज्ञ→
कमला लक्ष्मी देवी The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining her … Continue reading कमला देवी/ गायत्री / शनि→
मुख्य नाम : कमला । अन्य नाम : लक्ष्मी, कमलात्मिका, श्री, राजराजेश्वरी । भैरव : श्री कमलेश्वर विष्णु । तिथि : कोजागरी पूर्णिमा, अश्विन मास पूर्णिमा । कुल : श्री कुल । दिशा : उत्तर-पूर्व । स्वभाव : सौम्य स्वभाव । कार्य : धन, सुख, समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी । शारीरिक वर्ण : सूर्य की कांति के समान ।
महाविद्या Kamala Sadhana को करने के लिए साधक की समस्त सामग्री में विशेष रूप से सिद्धि युक्त होनी चाहिये ! यदि ऐसा नही हुई तो आप यह साधन नही कर सकोंगे ! महाविद्या कमला साधना के साधक को सिद्ध प्राण प्रतिष्ठित “कमला यंत्र व माला”, ये चीजें होनी चाहिये ! महाविद्या Kamala Sadhana आप नवरात्रि या किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार के दिन से शुरू कर सकते हैं ! Kamala Sadhana का समय रात्रि 9 बजे के बाद कर सकते हैं ! महाविद्या कमला देवी ,साधक को स्नान करके शुद्ध लाल वस्त्र धारण करके अपने घर में किसी एकान्त स्थान या पूजा कक्ष में पूर्व दिशा की तरफ़ मुख करके लाल ऊनी आसन पर बैठ जाए ! उसके बाद अपने सामने चौकी रखकर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर ताम्र पत्र की प्लेट में एक कमल का पुष्प रखें उसके बाद उस पुष्प के बीच में सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त “कमला यंत्र” को स्थापित करें ! और उसके दाहिनी तरफ भगवान शिव जी और अपने गुरु की फोटो स्थापित करें ! उसके बाद यन्त्र के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर यंत्र का पूजन करें और मन्त्र विधान अनुसार संकल्प आदि कर सीधे हाथ में जल लेकर
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है।
कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, कमलगट्टों की माला पर श्रीमन्त्र का जप, बिल्वपत्र तथा बिल्वफल के हवन से कमला की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
स्वतन्त्र तन्त्र में कोलासुर के वध के लिए इनका प्रादुर्भाव होना बताया गया है। मन्त्रों का जाप करने के बाद दिए गये मन्त्र जिसका आपने जाप किया हैं उस मन्त्र का दशांश ( 10% भाग ) हवन अवश्य करें !
हवन में कमल गट्टे, लाल पुष्प, शुद्ध घी ,हवन सामग्री को मिलाकर आहुति दें !
हवन के बाद कमला यंत्र को एक साल के लिए वही रख दें जंहा आपने साधना की हैं, और बाकि बची हुई पूजा सामग्री को नदी या किसी पीपल के नीचे विसर्जन कर आयें !
ऐसा करने से साधक की Kamala Sadhana पूर्ण हो जाती हैं ! और साधक के ऊपर माँ कमला देवी की कृपा सदैव बनी रही हैं ! Kamala Sadhana करने से साधक के जीवन में धन, धान्य, भूमि, वाहन, लक्ष्मी आदि की प्राप्ति होती है ! धन से जुडी सारी समस्या समाप्त हो जाएगी !
ॐ Kamakashi Lakshmi Shiva Tantra Sadhana Most secret tantra meditation to attain lot of wealth health and power full bless. Shiva-Lakshmi Connection: While Lakshmi is Vishnu’s … Continue reading Kamakshi Lakshmi Shiv Tantra→
उच्च श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना उच्चे: श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना महामाया का खेल योनि तंत्रा उच्च श्रवा लक्ष्मी तंत्र साधना एक गुप्त साधना है जिस से … Continue reading उच्च: श्रवा लक्ष्मी मंत्र साधना→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें स्थान पर हैं। … Continue reading कमला देवी महाविधा→
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है। कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, कमलगट्टों की माला … Continue reading कमला हवन यज्ञ→
कमला लक्ष्मी देवी The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining her blessings with … Continue reading कमला देवी/ गायत्री / शनि→
ॐ Kamakashi Lakshmi Shiva Tantra Sadhana Most secret tantra meditation to attain lot of wealth health and power full bless. Shiva-Lakshmi Connection: While Lakshmi … Continue reading Kamakshi Lakshmi Shiv Tantra→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें स्थान … Continue reading कमला देवी महाविधा→
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है। कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, कमलगट्टों … Continue reading कमला हवन यज्ञ→
कमला लक्ष्मी देवी The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining her … Continue reading कमला देवी/ गायत्री / शनि→
The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining her blessings with the power of the Gayatri mantra. It is chanted to attract abundance, peace, and spiritual growth, often recited 108 times for maximum benefits in front of Lakshmi Yantra.
Lyrics (Sanskrit):
Om Shree Mahalakshmyai Cha Vidmahe Vishnu Patnyai Cha Dheemahi Tanno Lakshmi Prachodayat.
Meaning: “Om, Let me meditate on the greatest Goddess, the wife of Lord Vishnu. Oh, Goddess Lakshmi, give me a higher intellect and enlighten my life with abundance and prosperity”. Benefits and Usage: Wealth & Success: Regularly chanting this mantra helps attract prosperity, fortune, and material comforts. Mental Peace: The, Mahakatha states that it fosters a positive mindset and removes, Mantra4u says it infuses, positive energy.
Timing: Often recited during daily prayers, meditation, or special occasions like Diwali.
Kamala Devi Lakshmi
|| राजराजेश्वरी शनि–लक्ष्मी स्तवनम् ||
मंत्र सिद्ध लक्ष्मी व शनि यँत्र स्थापना कर के साधना करनी आवश्यक होती हैं।
नमस्ते राजराजेशि शनि–नारायणसंयुते। कर्मसाक्षिणि देवेशि शरणं ते नमो नमः॥१ अर्थ – हे राजराजेश्वरी, शनि और नारायण से संयुक्त देवी! आप कर्मों की साक्षी हैं, मैं आपकी शरण में हूँ।
नीलश्यामे महागम्भीरे सिंहासनसमाश्रिते। न्यायधर्मप्रदे देवि शनि–लक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२ अर्थ – नीलवर्ण, गम्भीर, सिंहासनस्थ देवी! आप न्याय और धर्म प्रदान करती हैं।
अर्थ – शनि-मण्डल में स्थित होकर कर्मफल देने वाली देवी! हमें विवेकपूर्वक सुरक्षित रखें।
राजलक्ष्मि नमस्तुभ्यं स्थैर्य–सम्मानदायिनि। दारिद्र्यदुःखशमन्यै शनि-शक्त्यै नमो नमः॥४ अर्थ – हे राजलक्ष्मी! आप स्थायी समृद्धि और सम्मान देने वाली हैं।
भिन्नशृङ्खलपादाब्जे कर्मबन्धविमोचिनि। ऋणशोकभयच्छेदि प्रणमामि पुनः पुनः॥५ अर्थ – आपके चरणों में कर्म-बन्धन टूटते हैं, आप ऋण, शोक और भय हरती हैं।
दण्डनीलकमलधरे वराभयकरान्विते। संयमशक्तिसंयुक्ते मातस्ते नमो नमः॥६ अर्थ – दण्ड और नीलकमल धारण करने वाली, वर और अभय देने वाली देवी को नमस्कार।
गरुडध्वजसंरक्ष्ये वैष्णवी न्यायरूपिणि। शनि-दोषप्रशमन्यै राजेश्वरि नमो नमः॥७ अर्थ – गरुड़ द्वारा संरक्षित वैष्णवी देवी! आप शनि-दोष का शमन करती हैं।
राजकार्यविजयप्रदे धर्ममार्गप्रदर्शिनि। मानसम्मानवृद्ध्यर्थं त्वामहं शरणं गतः॥८ अर्थ – हे देवी! राजकीय कार्यों में विजय और धर्ममार्ग प्रदान करें।
कालो बाधते यस्य न दरिद्र्यं न विघ्नता। त्वत्प्रसादेन देवेशि तं पालय नमो नमः॥९ अर्थ – आपकी कृपा से काल, दरिद्रता और विघ्न बाधा नहीं बनते।
राजराजेश्वरी देवि शनि–लक्ष्मि नमोऽस्तु ते। कर्मशुद्धिं फलं मोक्षं देहि मातर्नमोऽस्तु ते॥१० अर्थ – हे राजराजेश्वरी शनि-लक्ष्मी! हमें कर्म-शुद्धि, उचित फल और मोक्ष प्रदान करें।
फलश्रुति यः पठेत् श्रद्धया नित्यं शनि–लक्ष्मी स्तवं शुभम्। स लभेत् स्थिरराज्यं च कर्मशान्तिं शुभां श्रियम्॥११ अर्थ – जो श्रद्धा से इस स्तवन का नित्य पाठ करता है, उसे कर्मशांति, स्थिर समृद्धि और सम्मान प्राप्त होता है।
ॐ Kamakashi Lakshmi Shiva Tantra Sadhana Most secret tantra meditation to attain lot of wealth health and power full bless. Shiva-Lakshmi Connection: While … Continue reading Kamakshi Lakshmi Shiv Tantra→
गुप्त नवरात्रि की दसवीं महाशक्ति और महाविद्या देवी कमला यानी लक्ष्मी जी हैं। संपन्नता, खुशहाली, वैभव, सौभाग्य, धन-यश की प्रतीक देवी कमला दसवें … Continue reading कमला देवी महाविधा→
कमला देवी हवन कमला देवी की कृपा से पृथ्वीपतित्व तथा पुरुषोत्तमत्व दोनों की प्राप्ति हो जाती है। कनकधारा स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ, … Continue reading कमला हवन यज्ञ→
कमला लक्ष्मी देवी The Lakshmi Gayatri Mantra is a sacred chant dedicated to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune, combining … Continue reading कमला देवी/ गायत्री / शनि→